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राज्य वृक्षों के संरक्षण को लेकर तेज हुआ आंदोलन, ट्री एक्ट बनाने की मांग, नहीं बना कानून तो 2 फरवरी से बीकानेर में महापड़ाव

Jasrasar times news 

राजस्थान में राज्य वृक्ष खेजड़ी सहित रोहिड़ा, जाल, कुमठा और फोग जैसे मरुस्थलीय पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को लेकर पर्यावरण प्रेमियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री महोदय राजस्थान सरकार के नाम ज्ञापन भेजकर राज्य में एक अलग और सशक्त कानून “ट्री एक्ट” बनाए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन मार्फत तहसीलदार जसरासर के माध्यम से जयपुर भेजा गया है।

ज्ञापन में बताया गया कि राज्य में चल रहे विभिन्न सरकारी और निजी प्रोजेक्ट्स के कारण लाखों हरे पेड़ काटे जा चुके हैं। विशेष रूप से जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, बालोतरा, फलोदी और बीकानेर जिलों में राज्य वृक्ष खेजड़ी की भारी कटाई हुई है। इसके अलावा जाल, कुमठा और फोग जैसे स्थानीय जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण वृक्ष भी तेजी से समाप्त हो रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि मरुस्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर सीधा हमला है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रदेश में वृक्षों के संरक्षण को लेकर लंबे समय से आंदोलन चल रहा है, जिसमें अब तक 600 दिनों से अधिक का धरना शामिल है। इसके बावजूद सरकार की ओर से ठोस और प्रभावी कानून नहीं बनाया गया, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में निराशा और रोष दोनों है। उनका कहना है कि वर्तमान में लागू 1955 के कानून में जुर्माना राशि बेहद कम है। हाल ही में कानून मंत्री द्वारा जुर्माना 100 रुपये से बढ़ाकर 1000 रुपये किए जाने की जानकारी दी गई थी, लेकिन आंदोलनकारियों का मानना है कि यह राशि आज के समय में नाकाफी है और इससे अवैध कटाई पर कोई रोक नहीं लग सकती।

पर्यावरण प्रेमियों ने मांग की है कि राज्य वृक्ष खेजड़ी, राज्य पुष्प रोहिड़ा सहित अन्य मरुस्थलीय पेड़ों के संरक्षण के लिए एक अलग और सख्त ट्री एक्ट बनाया जाए। इस कानून में अवैध कटाई पर कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान हो। साथ ही, इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वन विभाग या पुलिस विभाग में से किसी एक को स्पष्ट जिम्मेदारी दी जाए और उन्हें पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

ज्ञापन में यह भी मांग रखी गई है कि किसी भी नए प्रोजेक्ट को स्वीकृति देने से पहले वहां मौजूद पेड़ों की गिनती कर जियो-टैगिंग अनिवार्य की जाए। इसके अलावा संबंधित ग्राम पंचायत या नगर पालिका से एनओसी लेना जरूरी हो। हर बड़े प्रोजेक्ट के साथ ग्रीन बेल्ट विकसित करना भी कानूनन अनिवार्य किया जाए, ताकि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जा सके।

पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते सरकार ने ट्री एक्ट जैसा प्रभावी कानून नहीं बनाया, तो वे 2 फरवरी 2026 से बीकानेर मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन महापड़ाव शुरू करेंगे। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी जैसे वृक्ष केवल पेड़ नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय पहचान हैं। इनका संरक्षण केवल पर्यावरण के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए भी बेहद जरूरी है।

श्याम फोजी , बुधराम, हंसराज, रेवंतराम, सुरेश, बजरंग, विष्णु, प्रेमसुख, हरिकीशन, बाबूलाल जांगिड़

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